Monday, November 18, 2024

मीडिया संशय के कीडेको कैसे जीवित रखता है ?

 

    १४ नवंबर २०२४ को आजतक के वेब पेज पर एक खबर पढ़ी। खबर यह थी की एक सैयद शुजा नाम की व्यक्ति अमेरिकी रक्षा विभाग की तकनीक का उपयोग करके इवीएम हैक करने का दावा कर रहा है। महाराष्ट्र के २० नवंबर २०२४ को होने वाले चुनावों मे ५३ करोड़ मे ६३ सीटों के EVM हैक करनेका ऑफर दे रहा है।

    इस खबर मे इस व्यक्ति के तीन दावों की बात है। (१) वह अमेरिकी रक्षा विभाग की तकनीक उपयोग मे ले कर इवीएम हैक कर सकता है। (२) वह अमेरिकी रक्षा विभाग मे कॉन्ट्रेक्ट पर काम कर रहा है। (३) वह यानि ये शुजा २००९ से २०१४ तक इलेक्ट्रॉनिक कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (इसीआइएल) मे काम कर रहा था। २०१४ के लोकसभा चुनावों मे उपयोग मे ली गई इवीएम मशीन विकसित करने वाली टीम मे उसने काम किया है। आजतक की यह हिन्दी रिपोर्ट तो ठीक है क्यों की इस रिपोर्ट के अंत मे यह स्पष्ट हो जाता है की यह सारे दावे जूठे थे। पर यही खबर जब मैंने कुछ अंग्रेजी वेब पेज पर पढ़ी तो यह स्पष्ट हो रहा था की वे पाठकों के मन मे संशय का कीड़ा जीवंत रखना चाहते थे जब की १४ नवेम्बर के बाद इस खबर को कोई महत्व नही मिला। सुशिक्षित वर्ग को मूर्ख बनाने के लिए अंग्रेजी माध्यम ही सही है। यह वर्ग अपने आप मे व्यस्त और मस्त रहेता है और उसकी विशेषता यह है की उसके पास समय की बहुत ही कमी होती है।  

    शुजा के दावों की खबर पढ़ कर मेरे मन मे एक विचार आया की चलो देखते है शुजा इसीआइएल मे काम करता था या नही इस पर अगर गूगल पर सर्च करते है तो क्या मिलता है? गूगल करते ही मेरी नजर मे आई बिझनेस स्टैन्डर्ड की हेड लाइन, “EVM hacking row: Syed Shuja was never with us, claims ECIL” यह खबर २२ जनवरी २०१९ की है। यह हेड लाइन पढ़ते ही मेरे मन मे पहला प्रश्न यह उठा की ECIL क्लैम यानि दावा क्यों करेगा भाई ? क्लैम यानि दावा तो सच्चा या जूठा- कुछ भी हो सकता है। ECIL तो अपने कर्मचारियों के विषय मे उनके पास उपलब्ध रेकॉर्ड के आधार पर तथ्य बताएगाना ? अब आगे जब मै हेडलाइन से नीचे की कंटेन्ट पढ़ना चालू करता हूँ तो यह लिखा मिलता है। “The Electronics Corporation of India Limited (ECIL) said that Cyber expert Syed Shuja has neither been on the rolls of ECIL nor has been in any way associated with the design  and deployment of the EVMs.”  अब देखिए हेडलाइन का ‘claims’ नीचे कंटेन्ट मे आते ही said हो जाता है। क्या ‘claim’ और ‘said’ का अर्थ एक ही होता है ? यह हेडलाइन का ‘क्लैम’ रिपोर्ट की कंटेन्ट मे ‘सैड’ क्यों हो जाता है ? मात्र हेडलाइन पढ़ने वाले अंग्रेजी सुशिक्षित मूर्खों के मन मे संशय का कीड़ा जीवित रखने के लिए। मनुष्य की समझ मे भी ना आए ऐसे उसके अर्ध चेतन मन से खेलने का बढ़िया प्रयोग है यह। और मीडिया बड़ी कुशलता से इस तकनीक का प्रयोग करता है।        

    फिर इसके आगे ये घुमाफिरा के ECIL का प्रेस रिलिझ शब्दशह जस का तस छापते है जो इस प्रकार है। “On self-styled US – based Cyber Expert Syed Shuja claiming that he worked in ECIL between 2009-14, it is certified  from records that has neither been on rolls of ECIL as a regular employee nor was he in any way associated in design and deployment of EVMs”

    अब देखिए इनके पास ECIL का प्रेस रिलिझ पहेले से उपलब्ध था जो अपने रेकॉर्ड के आधार पर प्रमाणित करता है की सैयद शुजा ना तो उनके इम्प्लॉइ रोल पर था ना ही वो EVM की डिझाइन या उसके डिप्लॉइमन्ट यानि परिनियोजन से जुड़ा हुवा था। मेरी नझर मे इस खबर की सच्ची और प्रामाणिक हेडलाइन होती, “Syed Shuja was never employed with uscertifies ECIL. पर नही। ये ऐसा नही करेंगे। क्यों की ये जानते है ज्यादातर लोग हेडलाइन पढ़ कर ही खबर के विषय मे अपना मन बना लेते है और क्लैम शब्द पाठक के मानो मस्तिष्क पर जो चित्र अंकित करता है वह और certifies शब्द जो चित्र अंकित करता है उसमे बहुत बड़ा अंतर है। क्लैम शब्द संशय के कीड़े को जीवित रखता है और certifies शब्द संशय निरस्त कर देता है। इन्हे आपको आशंकित रखना है क्यों की इन्हे एंटी एस्टैब्लिश्मन्ट  होने का एजंडा चलाना है। इन्हे प्रो ट्रुथ होनेसे कोई मतलब नही है।

    यदि मूर्ख नही बनना है तो खबरे मात्र पढिए मत, खबरों का पोस्टमॉर्टम किया कीजिए।