इस देश के दम्भी बिनसांप्रदायिक कब तक भ्रम मे जियेंगे ?
आज कल कोईभी यदि यह
कह देता है की इस देशमे रहेनेवाले सभी हिन्दु है तो इसपर विवाद हो जाता है. पहले
मोहन भागवत के ऐसे बयान पर बबाल मचा. अब नजमा हेपतुल्ला के भी कुछ ऐसे ही बयान पर
खास करके २४ X ७ न्युझ चेनलो पर
बबाल मचाया जा रहा है. ऐसे मे कोंग्रेस के मनीष तिवारी जैसे “अति” विद्वान वकील जो
वास्तवमे प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी के कोंग्रेस मुक्त भारत के स्वप्न पर
स्वयं मोदीजी से भी ज्यादा उत्साह से कार्य कर रहे है वे अपनी बुद्धिका प्रदशर्न
करते है. यह बुद्धिमान ढोंगी बिन सांप्रदायिक वकील साहब समजते है की भारत को
हिन्दुओं का देश कहेने के बजाया भारतीयों का देश कहेने से हिंदुत्व से पीछा छुट
जाएगा. और उनकी ऐसी समज से प्रेरित हो कर वे सब को भारतका संविधान पढने की सलाह दे
देते है. भारत के संविधान मे हिन्दुस्थान का नाम भारत बताया गया है यह तो
निर्विवाद है. पर यह याद करने के बाद तुरंत ही ये खयाल आता है की संविधान मे भारत
नाम आया कहांसे ?मनीष तिवारी के कहेने पर सिर्फ संविधान का अनुच्छेद १ जो ये कहता
ही की "India, that
is Bharat, shall be a union of states," को पढ़ लेना ही
पर्याप्त नहीं होगा. संविधान मे इस देशका
नाम भारत तय करनेसे पहेले संविधान सभामे क्या चर्चाये हुई होगी यह भी देशके
नागरिकों को पढ़ना पडेगा. वैसे भारत नाम के पीछे जो इतिहास है वह इस देश के नागरिक
जानते है.
हम जो इतिहास जानते है उसके
मुताबिक भरत शकुन्तला और दुष्यंत का पुत्र था जो बादमे समुद्रसे हिमालय तक के पुरे
उपमहाद्वीप पर अपना साम्राज्य स्थापित
करता है और उसके इस साम्राज्य को भारतवर्ष के नाम से पहेचाना जाता है. दुष्यंत
चंद्र वंशीय क्षत्रिय राजा था. उस वक्त इस्लाम और इसाई धर्म का कहीं अता-पता भी
नहीं था. चन्द्र वंशीय क्षत्रिय हिन्दुओं मे ही हुवा करते थे. तो फिर हिन्दुस्थान
मे रहेने वालोँ को हिंदु न कहेते हुए यदी आप भारतीय कहेते है तो भी इस देश की मूल संस्कृति
हिंदु है इस बात से कैसे इनकार किया जा सकता है ? शायद इस देशके दम्भी बिन
साम्प्रदायिक लोग शाह्म्रुगकी तरह स्वयं इस भ्रम मे रहेना चाहते है की यह देश
भारतीयों का है ऐसा कहेने से धीरे धीरे इस देश की हिंदु पार्श्वभूमी भुलाना सम्भव
हो जाएगा. पर ऐसा होगा नही क्यों की जब भी आप भारत और भारतीयता की बात करेंगे तो
दुष्यंत, शकुन्तला और सम्राट भरत की भी याद आएगी और ऐसा होगा तो हिंदु और हिंदुत्व
को मिटाया जाना संभव नहीं है. तो फिर यह दंभी बिन साम्प्रदायिक तत्व क्यों स्वयं
भ्रम मे रहे कर दूसरों को भी भ्रम मे रखना चाहते है ? मेरी दृष्टिमे यह देश
हिन्दुओं का है यही वास्तविकता है. यह देश हिन्दुओं का है ऐसा कहेने मात्र से ऐसा
नहीं होता की अन्य धर्म के लोग यहाँ अपने धर्म का मुक्त रूपसे पालन नहीं कर सकते.
यहाँ सदियों से कंई धर्म फलते-फूलते रहे है. पर अन्य धर्म यहाँ फल-फुल सके इस लिए
यह देश हिन्दुओं का है ऐसा कहेने पर अघोषित पाबंदी लगादी जाती है तो फिर इस देश को
कोंग्रेस मुक्त करना अत्यंत आवश्यक हो जाता है.