एन आर सी (नॅशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटीजन्स ऑफ़ इंडिया) के तथ्य :
एक आसामी नागरिक स्मिता बरुआ की कलम से.
ऑल
आसाम स्टुडेंट्स युनियन (AASU) और ऑल आसाम गण संग्राम परिषद द्वारा अवैध
बांग्लादेशी घुसपैठियोंको पहेचान कर बंगलादेश वापस भेज देने की मान्ग्को लेकर ६ साल
तक आन्दोलन चला. इस आन्दोलन को आसामके लोगों का पूरा समर्थन प्राप्त था. लोगों की
तीव्र भावनाएं और दृढ़ संकल्प को देखते हुए
भारत की केंद्र सरकार को १५ अगस्त, १९८५ के दिन
आंदोलनकारियो के साथ MOS Memorrandum of settlement साइन करना पडा जो “आसाम
एकोर्ड” के नामसे जाना जाता है. एन आर सी का जन्म इसी समजौते से हुआ है.
इस
पुरी प्रक्रिया की जरूरत को समजने के लिए आसामकी भूगोल को थोडा समाजना पड़ेगा.
आसामकी ४०९६ किमी की सीमा अंतर राष्ट्रिय स्तर पर बंगलादेश और राष्ट्रीय स्तर पर
मेघालय, मिजोरम, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल से संलग्न है. उत्तरपश्चिमी राज्योंकी
छिद्रित सीमाओं की वजहसे अवैध घुसपैठ बहुतही आसान है.
बांगलादेश
मुक्ति संग्राम (१९७१) में लाखों की संख्या मे शरणार्थी घुस आये थे. और करीब उसी
कालावधिसे अवैध घुसपैठ की भी शुरुआत हुई. हालांकि शरणार्थी और अवैध घुसपैठिये को
अलग अलग दृष्टिकोणसे देखा जाता है. और इसी लिए एक तय निर्दिष्ट तारीख (cut off
date) २४ मार्च, १९७१ के बाद घुस आए अवैध घुसपैठियोंकी पहेचन स्थापित करने हेतु एन
आर सी प्रकिया अत्यंत आवश्यक है.
एक
नजर एन आर सी प्रक्रिया पर :
कोई
भी ऐसी व्यक्ति जो ये साबित कर सके की २४ मार्च, १९७१ के पहेले उसके पुरखें/पूर्वज
आसाम के निवासी थे या भारत के नागरिक थे वह व्यक्ति एनआरसीमे आपना नाम दर्ज
करानेके लिए पात्र है.
एनआरसी
मसौदा (draft) तैयार करनेकी प्रक्रिया मे ३.२९ करोड़ लोगोंकी जांच पड़ताल
(verification) की गयी. इस जांच पड़ताल के लिए आवेदकों द्वारा प्रिषित किये गए ६.६
करोड़ दस्तावेजोकी जांच की गई. ५.५ लाख दस्तावेज देशके विविध राज्यों मे जांच के
लिए भेजे गए. और ये सारी प्रक्रिया सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी मे हुई.
३०
जुलाई, २०१८ को प्रसिध्ध की गयी एनआरसी लिस्ट अभी सिर्फ एक मसौदा (draft) है.
नागरिकों को आपना दावा, विरोध/आपत्ति दर्ज करानेके लिए पूरा समय दिया गया है.
अंतिम एनआरसी सूची इन दावों, विरोध/आपत्तियो का निपटान करने के बाद ही प्रसिध्ध
होगी. सरकार और सर्वोच्च न्यायालय दोनों ने इस बातपर पुरा बल दिया है.
एनआरसी
की आखिरी सूचि तैयार हो जानेके बादभी यदि कोई व्यथित है तो उसे Foreigners
Tribunal अपील करने का अधिकार है.
यह
पढनेके बाद आपको यकीन हो जाएगा की विपक्षों द्वारा किया जाने वाला शोर अर्थहीनहै.
आगे
तसल्ली और पूर्ण जानकारी के लिए स्मिता बरुआ द्वारा लिखित पुरा आर्टिकल पढ़िए.
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